देशभर में इन दिनों नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में दो समानांतर आंदोलन चल रहे है। एक ओर जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आंदोलन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन संसद के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे है। इस पूरे घटनाक्रम ने विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए है।
जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन
पिछले लगभग एक माह से CJP द्वारा जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, पीड़ित छात्रों को न्याय तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन चलाया जा रहा है।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने भूख हड़ताल भी की। बाद में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के जुड़ने से आंदोलन को नई ऊर्जा मिली। संसद सत्र शुरू होने के बाद CJP ने संसद मार्च का आह्वान किया, जिसे व्यापक समर्थन मिलने का दावा किया गया। पंजाब विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने भी इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया।
राजनीतिक दलों की एंट्री और विपक्ष में खींचतान
जैसे ही राजनीतिक दल आंदोलन में सक्रिय हुए, विपक्ष के भीतर नेतृत्व को लेकर प्रतिस्पर्धा भी सामने आने लगी। इंडिया गठबंधन दो खेमों में बंटता दिखाई दिया। एक ओर आम आदमी पार्टी CJP के आंदोलन के साथ नजर आई, जबकि कांग्रेस अपने सहयोगी दलों के साथ अलग रणनीति अपनाते हुए संसद के भीतर और बाहर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगी।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में विरोध प्रदर्शन किया तथा प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना भी दिया। कांग्रेस ने तीन प्रमुख मांगें रखीं
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा।
- पीड़ित छात्रों को न्याय।
समान मांगें, अलग-अलग मंच
दिलचस्प बात यह है की CJP भी लगभग यही मांगें उठा रही है शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और छात्रों को न्याय। इसके बावजूद कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलन को समर्थन नहीं दिया। वहीं आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया की कांग्रेस छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।
चुनावी राजनीति का प्रभाव
पंजाब और उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल युवाओं के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहते है। इसी कारण सभी दल छात्र आंदोलन के समर्थन में दिखाई देना चाहते है। आलोचकों का मानना है कि छात्र आंदोलन के बहाने राजनीतिक दल अपने-अपने हित साधने का प्रयास कर रहे है।
हिंसक घटनाएं और पुलिस कार्रवाई
आंदोलन के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति भी बनी। आरोप है की प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों पर पथराव तथा झड़प की घटनाएं सामने आई।
स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने और लाठीचार्ज करना पड़ा। इन घटनाओं में पुलिसकर्मियों और कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबरें सामने आई।
मीडिया का फोकस और संसद में गतिरोध
आंदोलन के दौरान हिंसक घटनाओं के बाद मीडिया का ध्यान धीरे-धीरे छात्र आंदोलन से हटकर संसद में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन और राहुल गांधी की गतिविधियों पर केंद्रित होता दिखाई दिया।
विपक्ष को यह महसूस हुआ की संसद और सड़क दोनों जगह दबाव बनाने से सरकार पर असर पड़ रहा है। इसी कारण संसद में लगातार गतिरोध बना हुआ है और कई दिनों तक कार्यवाही बाधित रही।
सरकार की पहल
केंद्र सरकार ने मामले में तेजी से कदम उठाने शुरू किए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति पर नजर रख रहे है। साथ ही सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था तथा इस विषय पर नया कानून लाने की दिशा में भी प्रयास कर रही है।
CJP के प्रतिनिधिमंडल से केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह लगातार संपर्क में रहकर बातचीत कर रहे है। यह स्पष्ट नहीं है की यह आंदोलन कब तक चलेगा और इसका अंतिम परिणाम क्या होगा। हालांकि इतना तय है की इसका प्रभाव राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।
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