प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में संसद का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहा है। इस बार का सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। सरकार इस सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़े प्रावधानों, परिसीमन (Delimitation) से संबंधित विधेयक तथा ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विषयों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। वहीं विपक्ष श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, पेपर लीक, गैस, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
संसद में बदलेगा राजनीतिक समीकरण
इस बार संसद का दृश्य पिछले सत्र की तुलना में काफी अलग दिखाई दे सकता है। पिछले सत्र में सरकार के विरोध में मुखर रहने वाले कई सांसद अब सत्ता पक्ष का हिस्सा बन चुके हैं और सरकार के समर्थन में दिखाई देंगे। वहीं विपक्षी दलों के कई सांसद अलग-अलग दलों में बंट जाने के कारण विपक्ष की एकजुटता कमजोर होती नजर आएगी।
एनडीए की स्थिति पहले से अधिक मजबूत
बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसदों के एनडीए के समर्थन में आने तथा शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 सांसदों के साथ जुड़ने से लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है।
दूसरी ओर विपक्षी दलों में आंतरिक मतभेद बढ़े हैं। तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक सहित कुछ दल संसद में अलग रुख अपनाते दिखाई दे सकते है, जिससे विपक्ष की संयुक्त रणनीति प्रभावित होने की संभावना है।
राज्यसभा में भी बदलेंगे समीकरण
राज्यसभा में भी इस बार राजनीतिक तस्वीर बदली हुई नजर आ सकती है। आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सदस्यों के एनडीए में शामिल होने तथा हाल ही में निर्वाचित नए सदस्यों के आने से सत्तापक्ष की ताकत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही तृणमूल कांग्रेस के कुछ नए सदस्य भी एनडीए के समर्थन में आने की चर्चा है।
मध्य प्रदेश से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस बार राज्यसभा में दिखाई नहीं देंगे, क्योंकि उन्होंने दोबारा चुनाव नहीं लड़ा।
महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार की रणनीति
सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति मजबूत होने के बावजूद संविधान संशोधन से जुड़े विधेयकों को पारित कराने के लिए अभी भी दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। अनुमानतः सरकार को लगभग 30 अतिरिक्त सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
सरकार छोटे दलों, अन्नाद्रमुक तथा महाराष्ट्र के शरद पवार गुट सहित अन्य सहयोगी दलों से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। कुछ दल परिसीमन में जनसंख्या के बजाय सीटों में न्यूनतम 50 प्रतिशत वृद्धि जैसे सुझाव भी दे रहे है। यदि व्यापक सहमति बनती है तो सरकार को उम्मीद है कि ये महत्वपूर्ण विधेयक दोनों सदनों से पारित हो सकते हैं।
संसद के प्रमुख सत्र
भारत में सामान्यतः संसद के तीन नियमित सत्र आयोजित किए जाते है –
बजट सत्र : यह वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण सत्र माना जाता है। इसमें केंद्र सरकार आम बजट प्रस्तुत करती है तथा विभिन्न मंत्रालयों के आय-व्यय और आगामी वित्तीय वर्ष के बजट का अनुमोदन कराया जाता है।
मानसून सत्र : मानसून के दौरान आयोजित होने वाले इस सत्र में सरकार विभिन्न विधेयकों को संसद के दोनों सदनों से पारित कराने का प्रयास करती है।
शीतकालीन सत्र : वर्ष के अंतिम चरण में आयोजित इस सत्र में भी कई महत्वपूर्ण विधेयकों तथा नीतिगत विषयों पर चर्चा होती है।
आवश्यकता पड़ने पर सरकार विशेष संसद सत्र भी बुला सकती है।
संसद की कार्यप्रणाली
संसद के प्रत्येक सत्र में सरकार विभिन्न विधेयक प्रस्तुत करती है। इन पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होती है। आवश्यकता पड़ने पर किसी विधेयक को विस्तृत अध्ययन के लिए संसदीय स्थायी समिति (Standing Committee) को भी भेजा जाता है।
भारतीय संसद के प्रमुख ऐतिहासिक निर्णय
1950–1960
भारतीय संविधान लागू हुआ।
प्रथम आम चुनावों की व्यवस्थाएं बनीं।
राज्यों का पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित हुआ।
1960–1970
हरित क्रांति से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
1970–1980
1975 में आपातकाल लागू किया गया।
42वां संविधान संशोधन पारित हुआ।
1980–1990
1985 में दल-बदल विरोधी कानून लागू किया गया।
पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में पहल हुई।
1990–2000
1991 की नई आर्थिक नीति एवं उदारीकरण लागू हुआ।
73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला।
2000–2010
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 लागू हुआ।
शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 पारित हुआ।
2010–2020
2016 में जीएसटी (GST) लागू किया गया।
2019 में अनुच्छेद 370 हटाया गया।
नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पारित किया गया।
2020–2026
2020 में कृषि कानून पारित हुए, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया।
2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) पारित हुआ।
नए संसद भवन में विशेष संसद सत्र आयोजित किया गया।
भारतीय संसद का लोकतांत्रिक महत्व
स्वतंत्रता के बाद से भारतीय संसद के चार सौ से अधिक संसदीय सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। पहला लोकसभा सत्र 1952 में हुआ था। तब से अब तक संसद ने देश के राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और संवैधानिक विकास से जुड़े अनेक ऐतिहासिक कानून और निर्णय लिए हैं।
भारतीय संसद के सत्र केवल औपचारिक बैठकें नहीं होते, बल्कि वे लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैं। इन्हीं सत्रों के माध्यम से नए कानून बनते हैं, सरकार की जवाबदेही तय होती है और देश की नीतियों की दिशा निर्धारित होती है।
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