देश में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम 4 मई 2026 को घोषित हुए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पश्चिम बंगाल, असम और पांडुचेरी में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि केरल में कांग्रेस समर्थित गठबंधन और तमिलनाडु में टीवीके पार्टी ने अपनी जीत दर्ज कराई।
पांच में से तीन राज्यों में भाजपा की जीत ने यह सिद्ध किया है कि देश में आज भी मोदी लहर कायम है और जनता का भरोसा भाजपा पर बना हुआ है।
संगठनात्मक नेतृत्व की सफलता
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लिए भी यह परिणाम उत्साहजनक रहे। उनके नेतृत्व में पहली बार पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव सम्पन्न हुए, जिनमें से तीन राज्यों में पार्टी को जीत मिली।
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बंगाल, असम और पांडुचेरी की जनता ने भाजपा पर विश्वास जताया है और पार्टी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेगी। उन्होंने जनता, पार्टी कार्यकर्ताओं, चुनाव आयोग और सुरक्षाबलों के प्रति आभार व्यक्त किया।
अपने संबोधन में मोदी ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसकी वाम विचारधारा को जनता ने पहले ही ठुकरा दिया है और अब कांग्रेस उसी राह पर चल रही है।
पश्चिम बंगाल : ऐतिहासिक बदलाव
पश्चिम बंगाल में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने मिलकर बड़ी जीत हासिल की। भाजपा ने जनता को भरोसा दिलाया कि राज्य से भ्रष्टाचार, भय और अपराध समाप्त होंगे तथा विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
ममता बनर्जी द्वारा भाजपा को “बाहरी” बताने और खान-पान पर प्रतिबंध जैसे मुद्दों को उठाने का जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। भाजपा को एंटी-इन्कम्बेंसी का भी लाभ मिला।
293 सीटों वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 200 से अधिक सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि टीएमसी लगभग 79 सीटों पर सिमट गई। फाल्टा सीट पर पुनर्मतदान 21 मई को होना है।
असम : लगातार तीसरी जीत
असम में 126 सीटों पर हुए चुनाव में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने तीसरी बार 100 से अधिक सीटें जीतकर हैट्रिक लगाई। कांग्रेस यहाँ प्रभावी प्रदर्शन नहीं कर सकी।
पुडुचेरी : एनडीए की वापसी
पुडुचेरी में 30 सीटों के चुनाव में एनडीए गठबंधन ने 18 सीटों पर जीत दर्ज कर दूसरी बार सरकार बनाने की स्थिति हासिल की।
केरल : वामपंथ का पतन
केरल में 140 सीटों के चुनाव में कांग्रेस समर्थित यूडीएफ ने 100 से अधिक सीटें जीतकर बड़ी सफलता हासिल की। इसे वामपंथ के अंतिम मजबूत गढ़ के पतन के रूप में देखा जा रहा है।
तमिलनाडु : नया राजनीतिक उदय
तमिलनाडु में 234 सीटों के चुनाव में डीएमके को भारी नुकसान हुआ और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन स्वयं चुनाव हार गए। थलापति विजयन के नेतृत्व में टीवीके पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाने की स्थिति बनाई।
अन्नाद्रमुक ने ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
एग्जिट पोल और विश्लेषण
एमपी लाइव के पोल ऑफ पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल में भाजपा के 180 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया था, जबकि असम और पांडुचेरी में भी भाजपा सरकार की संभावना जताई गई थी। तमिलनाडु में डीएमके की हार का भी अनुमान सही साबित हुआ।
प्रमुख चुनावी घटनाएं
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को 15,000 से अधिक मतों से हराया। पाँच राज्यों में से तीन में एंटी-इन्कम्बेंसी देखने को मिली। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की हार यह दर्शाती है कि जनता सर्वोपरि है और जो भी जनता से ऊपर उठने का प्रयास करता है, उसे जनता सबक सिखाती है।
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