मोदी सरकार के 12 साल, उपलब्धियों, चुनौतियों और नए भारत की कहानी

narendra modi

भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार 12 वर्षों तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले देश के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए हैं। 9 जून 2026 को उनके प्रधानमंत्री पद के 12 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने न केवल लगातार तीन लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी को जीत दिलाई, बल्कि शासन, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई बड़े बदलावों का नेतृत्व भी किया। हालांकि उनके कार्यकाल को लेकर तीखी आलोचनाएं और बहसें भी होती रही हैं। इसलिए इन 12 वर्षों का मूल्यांकन उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों के आधार पर किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री पद पर सबसे लंबे कार्यकाल की दौड़

भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने 1947 से 1964 तक लगभग 16 वर्ष 9 महीने तक देश का नेतृत्व किया। उनके बाद इंदिरा गांधी का स्थान आता है, जिनका कुल कार्यकाल लगभग 15 वर्ष रहा।

नरेन्द्र मोदी 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री बने थे और 2026 तक लगभग 12 वर्ष पूरे कर चुके हैं। यदि उनका कार्यकाल 2029 तक जारी रहता है तो वे इंदिरा गांधी के कुल कार्यकाल को पीछे छोड़ सकते हैं और नेहरू के रिकॉर्ड के और करीब पहुंच जाएंगे। लगातार तीन बार सत्ता में वापसी भी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।

आर्थिक क्षेत्र में उपलब्धियां

मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना माना जाता है। पिछले दशक में भारत ने ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान प्राप्त किया। सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए “मेक इन इंडिया” अभियान चलाया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं शुरू कीं।

वस्तु एवं सेवा कर (GST) को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में गिना जाता है। इससे पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली लागू हुई। हालांकि शुरुआती वर्षों में व्यापारियों और छोटे उद्योगों को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा।

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। एनपीसीआई द्वारा संचालित यूपीआई प्रणाली ने भुगतान व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। आज भारत डिजिटल लेन-देन के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।

बुनियादी ढांचा और विकास

मोदी सरकार ने सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के निर्माण पर विशेष जोर दिया। देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और भारतमाला जैसी परियोजनाओं ने लॉजिस्टिक्स सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

रेलवे में वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत, स्टेशनों के आधुनिकीकरण और माल परिवहन क्षमता बढ़ाने के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, गैस कनेक्शन और शौचालय निर्माण को लेकर भी व्यापक अभियान चलाए गए।

विदेश नीति में नया दृष्टिकोण

मोदी सरकार की विदेश नीति को सक्रिय और आक्रामक कूटनीति के रूप में देखा जाता है। भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति को मजबूत किया। जी-20 की अध्यक्षता और उसके सफल आयोजन को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनती है।

भारत ने अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ संबंध मजबूत किए। साथ ही रूस के साथ भी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखी। इस संतुलित विदेश नीति को भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और बड़े राजनीतिक फैसले

2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक को मोदी सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति भी अपनाई गई।

अनुच्छेद 370 को हटाने का निर्णय मोदी सरकार के सबसे बड़े राजनीतिक कदमों में माना जाता है। सरकार का दावा है कि इससे जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण हुआ, जबकि विपक्ष ने इसके तरीके और प्रभावों पर सवाल उठाए।

सामाजिक कल्याण योजनाओं का विस्तार

प्रधानमंत्री जन धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से करोड़ों लोगों तक सरकारी सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया।

सरकार का दावा है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से भ्रष्टाचार कम हुआ और लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुंची।

आलोचनाएं और चुनौतियां

मोदी सरकार के 12 वर्षों का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों के आधार पर नहीं किया जा सकता। विपक्ष और अनेक विशेषज्ञों ने कई मुद्दों पर आलोचना भी की है।

2016 की नोटबंदी को लेकर आज भी मतभेद बने हुए हैं। समर्थक इसे काले धन और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाला कदम मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे आर्थिक गतिविधियों को नुकसान पहुंचा।

बेरोजगारी, कृषि संकट, महंगाई और आय असमानता जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। किसानों के आंदोलन और कृषि कानूनों की वापसी ने सरकार को राजनीतिक चुनौती भी दी।

कुछ आलोचकों का आरोप है कि संस्थागत स्वायत्तता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विमर्श पर दबाव बढ़ा है। वहीं सरकार का कहना है कि उसने सुशासन, पारदर्शिता और निर्णायक नेतृत्व प्रदान किया है।

राजनीतिक दृष्टि से महत्व

मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता को बनाए रखना रही है। अटल बिहारी वाजपेयी के बाद वे ऐसे नेता हैं जिन्होंने भाजपा को लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बनाए रखा है।

2024 के बाद गठबंधन सरकार का नेतृत्व करते हुए भी उनकी राजनीतिक पकड़ बनी हुई है, जो उनके नेतृत्व की प्रभावशीलता को दर्शाती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्ष भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली दौरों में गिने जाएंगे। इस अवधि में भारत ने आर्थिक विकास, डिजिटल क्रांति, बुनियादी ढांचे के विस्तार और वैश्विक प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय प्रगति की है। दूसरी ओर बेरोजगारी, सामाजिक ध्रुवीकरण, कृषि संकट और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर उठे प्रश्न भी इस दौर की वास्तविकता रहे हैं।

इसलिए मोदी के 12 वर्षों को न तो केवल उपलब्धियों का स्वर्णकाल कहा जा सकता है और न ही केवल आलोचनाओं का कालखंड। यह एक ऐसा दौर है जिसने भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और शासन व्यवस्था की दिशा को गहराई से प्रभावित किया है। आने वाले वर्षों में यह तय होगा कि नरेन्द्र मोदी क्या नेहरू और इंदिरा गांधी के दीर्घकालिक नेतृत्व संबंधी रिकॉर्डों को पार कर भारतीय इतिहास के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्रियों में शीर्ष स्थान हासिल कर पाते हैं या नहीं।

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