भारत और फ्रांस के बीच अंतरिक्ष सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है। इसी सहयोग की एक महत्वपूर्ण कड़ी तृष्णा (TRISHNA) मिशन है, जिसे दोनों देशों द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। यह मिशन पृथ्वी की सतह के तापमान, जल संसाधनों, कृषि और जलवायु परिवर्तन की निगरानी के लिए अत्याधुनिक आंकड़े उपलब्ध कराएगा।
तृष्णा मिशन क्या है?
तृष्णा एक पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रह है, जो थर्मल इंफ्रारेड तकनीक की सहायता से पृथ्वी की सतह के तापमान का अत्यंत सटीक मापन करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन, कृषि उत्पादकता में वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करना है।
इस मिशन में दो प्रमुख उपकरण लगाए जाएंगे
थर्मल इंफ्रारेड पेलोड — फ्रांस द्वारा विकसित।
VNIR-SWIR पेलोड — भारत द्वारा विकसित।
इन दोनों उपकरणों से प्राप्त आंकड़ों को मिलाकर वैज्ञानिक भूमि की नमी, फसलों की स्थिति, तापमान तथा ऊर्जा संतुलन का विस्तृत अध्ययन कर सकेंगे।
कब होगा प्रक्षेपण?
वर्तमान योजना के अनुसार तृष्णा मिशन का प्रक्षेपण वर्ष 2026 में भारत के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी रॉकेट द्वारा किया जाएगा।
मिशन की परिचालन अवधि लगभग पांच वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है। उपग्रह को लगभग 761 किलोमीटर ऊंचाई वाली सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit) में स्थापित किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र में सहायता
तृष्णा किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। यह बताएगा कि किन क्षेत्रों में फसलों को पानी की आवश्यकता है और कहां जल की कमी के कारण फसल तनाव (Crop Stress) की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इससे सिंचाई योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
जल संसाधन प्रबंधन में योगदान
भारत सहित दुनिया के कई देश जल संकट का सामना कर रहे हैं। तृष्णा नदियों, झीलों और भूजल से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगा, जिससे जल संरक्षण और जल वितरण की बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी। यह मिशन जल संसाधनों के सतत प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जलवायु परिवर्तन की निगरानी
वैश्विक तापमान वृद्धि, सूखा, बाढ़ और हीट वेव जैसी घटनाओं को समझने में यह मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पृथ्वी की सतह के तापमान का नियमित अवलोकन जलवायु मॉडल को अधिक सटीक बनाने में मदद करेगा, जिससे भविष्य की पर्यावरणीय चुनौतियों का बेहतर आकलन संभव हो सकेगा।
हिमनद और बर्फ की निगरानी
हिमालय सहित दुनिया के विभिन्न हिमनदों पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। तृष्णा मिशन बर्फ और हिमनदों के पिघलने की गति का अध्ययन करने में सहायता करेगा, जिससे जल संसाधनों और समुद्र-स्तर वृद्धि से जुड़े शोधों को नई दिशा मिलेगी।
शहरी क्षेत्रों का अध्ययन
बड़े शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण शहरी क्षेत्रों का तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में अधिक हो जाता है। यह मिशन शहरों के तापमान वितरण का अध्ययन कर शहरी नियोजन, हरित क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संरक्षण की योजनाओं को मजबूत करेगा।
आपदा प्रबंधन में सहायक
जंगलों में आग, सूखा, अत्यधिक गर्मी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की प्रारंभिक पहचान में यह उपग्रह उपयोगी होगा। इसके माध्यम से समय रहते चेतावनी जारी की जा सकेगी, जिससे जन-धन की हानि को कम करने में मदद मिलेगी।
भारत और फ्रांस के लिए महत्व
तृष्णा केवल एक वैज्ञानिक मिशन नहीं है, बल्कि भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी का भी प्रतीक है। यह दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान, पृथ्वी अवलोकन और जलवायु अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करेगा। इससे पहले भी भारत और फ्रांस कई सफल अंतरिक्ष मिशनों पर साथ काम कर चुके हैं और तृष्णा इस साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
तृष्णा मिशन भारत और फ्रांस के अंतरिक्ष सहयोग का एक ऐतिहासिक कदम है। यह उपग्रह कृषि, जल प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में नई संभावनाएं खोलेगा। वर्ष 2026 में इसके प्रक्षेपण के बाद भारत को पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाला डेटा प्राप्त होगा, जिससे किसानों, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
आने वाले वर्षों में यह मिशन जल और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है तथा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
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