पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के सफाये और भारतीय जनता पार्टी की सुवेंदु अधिकारी बनने के बाद से ही राज्य की राजनीति में भारी हलचल देखने को मिल रही है। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद से ही तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह और नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं तेज हो गई थीं, जिनके संकेत अब धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगे हैं।
फालता सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत
21 मई को हुए फालता विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान द्वारा चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद भाजपा ने इस सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार ने यहां एक लाख से अधिक मतों से विजय हासिल की। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जो जहांगीर खान कभी “पुष्पा बनकर साल झुकेगा नहीं” जैसे बयान दे रहे थे, वे अचानक चुनावी मैदान से ही गायब हो गए।
सुवेंदु अधिकारी की कार्यशैली से विपक्ष में बेचैनी
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जिस तेजी से प्रशासनिक कार्यवाही और फैसले लेना शुरू किए हैं, उससे विपक्षी दलों में बेचैनी का माहौल दिखाई दे रहा है। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर कार्रवाई की आशंका के चलते कई नेता और समर्थक असहज महसूस कर रहे हैं।
इसी के साथ यह भी कहा जा रहा है कि बंगाल में लंबे समय से सक्रिय घुसपैठियों पर भी सख्ती बढ़ी है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोग वापस बांग्लादेश लौट रहे हैं। इन परिस्थितियों ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के भीतर भी भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।
तृणमूल कांग्रेस में इस्तीफों का दौर
राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर निगमों के 100 से अधिक पार्षदों द्वारा तृणमूल कांग्रेस से सामूहिक इस्तीफा देने की खबरों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। वहीं ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली सांसद एवं संसद में तृणमूल कांग्रेस की व्हीप नेता काकोली घोष दस्तीदार ने 26 मई को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
काकोली घोष तृणमूल कांग्रेस की तेजतर्रार महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा कि पार्टी में उनकी लगातार अनदेखी की जा रही थी और उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने राज्य में हुए कथित भ्रष्टाचार और आरजी कर कॉलेज में महिला के साथ हुए बलात्कार की घटना पर भी दुख व्यक्त किया।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, काकोली घोष के साथ तृणमूल कांग्रेस के छह नव निर्वाचित विधायकों ने भी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की है। हालांकि काकोली घोष का कहना है कि वे अभी भी पार्टी की सामान्य सदस्य बनी हुई हैं और पार्टी के लिए कार्य करती रहेंगी।
सांसदों के भाजपा संपर्क में होने की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि तृणमूल कांग्रेस के 12 से अधिक सांसद सामूहिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। इन सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने की बातें कही जा रही है। यह भी चर्चा है कि भाजपा चाहती है कि राज्यसभा के सांसद भी इन नेताओं के साथ पार्टी छोड़ें, जिससे भाजपा की राज्यसभा में स्थिति और मजबूत हो सके। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने खुलकर कोई बयान नहीं दिया है और सभी ने चुप्पी साध रखी है।
विपक्षी राजनीति पर असर
दिल्ली में आम आदमी पार्टी के कमजोर होने के बाद ममता बनर्जी को भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरों में गिना जा रहा था। लेकिन पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बाद अब भाजपा को सीधी चुनौती देने वाला मजबूत विपक्षी नेतृत्व कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता समय-समय पर भाजपा का विरोध करते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनता का भरोसा इन दलों पर पहले जैसा नहीं रह गया है।
मोदी सरकार के 12 साल और भाजपा की तैयारी
इधर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भाजपा ने देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने अपने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से लेकर 21 जून विश्व योग दिवस तक जनता के बीच जाकर मोदी सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाएं।
भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अभी से चुनावी तैयारी में जुट गई है, जबकि विपक्षी दल अभी भी आपसी गुटबाजी और अंदरूनी संघर्षों में उलझे नजर आ रहे हैं।
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