विश्व प्रसिद्ध मोहनखेड़ा जैन तीर्थ विवादों में घिरा, प्रबंधन पर गंभीर आरोप

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जैन समाज का मूल सिद्धांत “अहिंसा परमो धर्म” माना जाता है, लेकिन मध्य प्रदेश के धार जिले की राजगढ़ तहसील स्थित विश्व प्रसिद्ध मोहनखेड़ा जैन तीर्थ इन दिनों विवादों के कारण चर्चा में है। जैन संतों और तीर्थ प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों के बीच उत्पन्न विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है, जिससे पूरे जैन समाज में चिंता और असंतोष का माहौल बन गया है।

मोहनखेड़ा तीर्थ आचार्य दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज की पुण्यभूमि माना जाता है। यहां अनेक आचार्यों और संतों ने तपस्या की है तथा देश-विदेश में इसकी विशेष धार्मिक प्रतिष्ठा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेता भी समय-समय पर यहां संतों का आशीर्वाद लेने आते रहे हैं।

प्रबंधन पर अनियमितताओं के आरोप

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोहनखेड़ा तीर्थ का प्रबंधन अर्जुन मेहता के हाथों में है। उनके विरुद्ध लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक धांधलियों के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि कई कर्मचारियों को चार-पांच महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए अलग-अलग तीन रजिस्टर संचालित किए जाने तथा उनमें कथित रूप से भारी हेराफेरी किए जाने की बातें भी सामने आ रही हैं।

इस संबंध में अर्जुन मेहता से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि वे ऐसे विषयों पर फोन पर चर्चा नहीं करते और आमने-सामने बैठकर ही अपनी बात रखेंगे।

जैन संत ने दर्ज कराई पुलिस शिकायत

विवाद से जुड़े जैन संत जीतचंद्रजी महाराज, जो दिग्वंत संत आचार्य ऋषभचंद्र विजयजी महाराज के शिष्य हैं, ने बताया कि तीर्थ के कर्मचारी एवं प्रबंधन कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं देते तथा संतों के धार्मिक कार्यों में भी बाधाएं उत्पन्न करते हैं।

उनके अनुसार उन्होंने इस संबंध में ट्रस्टी सुजानमल सेठ और उनकी पत्नी के समक्ष शिकायत की थी। इसी दौरान अर्जुन मेहता वहां पहुंचे और कथित रूप से ट्रस्टियों के सामने ही उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट करने दौड़े।

इस घटना के बाद संत द्वारा राजगढ़ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296 एवं 131 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच एएसआई किर्तनसिंह नायक को सौंपी है। हालांकि अभी तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

पहली बार पुलिस संरक्षण की नौबत

मोहनखेड़ा जैन तीर्थ के इतिहास में यह संभवतः पहली बार है जब परिसर से जुड़े किसी संत को पुलिस संरक्षण की आवश्यकता महसूस हुई है। इससे पहले इस धार्मिक स्थल पर इस प्रकार का कोई पुलिस प्रकरण दर्ज होने की जानकारी नहीं मिलती।

समाज के कई लोगों का मानना है कि एक त्यागी साधु, जिसने सांसारिक जीवन छोड़कर धर्म सेवा का मार्ग अपनाया है, उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही अभद्रता के आरोप झेल रहे कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई न होना भी कई सवाल खड़े करता है।

ओल्ड एज होम परियोजना को लेकर बढ़ा विवाद

जानकारी के अनुसार दिग्वंत संत आचार्य ऋषभचंद्र विजयजी महाराज की इच्छा थी कि मोहनखेड़ा तीर्थ में एक भव्य वृद्धाश्रम (ओल्ड एज होम) की स्थापना की जाए।

वर्तमान में संत जीतचंद्र सूरीश्वरजी इस परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। आरोप है कि ट्रस्ट और उससे जुड़े कुछ कर्मचारी इस कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। साथ ही कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की मांग को लेकर भी संत लगातार आवाज उठा रहे हैं।

समाज के कुछ लोगों का कहना है कि प्रबंधन के संरक्षण के कारण कुछ कर्मचारियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि वे अब संतों के सम्मान की भी परवाह नहीं कर रहे हैं।

200वें स्थापना वर्ष से पहले बढ़ी चिंता

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2027 में दादा गुरु श्रीमद् राजेन्द्र विजय जयंती सूरीश्वरजी महाराज का 200वां स्थापना वर्ष मनाया जाना है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर से पहले तीर्थ में इस प्रकार के विवादों का सामने आना समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है।

‘स्टैच्यू ऑफ जैन यूनिटी’ को लेकर मतभेद

महातीर्थ मोहनखेड़ा में 18 एवं 19 जून 2026 को बड़े धार्मिक आयोजन प्रस्तावित हैं। इनमें “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” की तर्ज पर “स्टैच्यू ऑफ जैन यूनिटी” निर्माण परियोजना का भूमि पूजन भी शामिल है।

18 जून को आचार्य लेखेन्द्र सूरीश्वरजी महाराज एवं हितेशचंद्र सूरीश्वरजी महाराज के सानिध्य में भूमि पूजन कार्यक्रम प्रस्तावित है। वहीं 19 जून को वर्ष 2027 के द्विशताब्दी महोत्सव के आयोजन हेतु जाजम की बोली का कार्यक्रम रखा गया है।

हालांकि इन आयोजनों को लेकर भी समाज के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

समाज दो गुटों में बंटा

एक पक्ष का मानना है कि स्टैच्यू ऑफ जैन यूनिटी के निर्माण से तीर्थ की मूल धार्मिक गरिमा प्रभावित हो सकती है तथा यह धार्मिक स्थल धीरे-धीरे पर्यटन केंद्र का स्वरूप ले सकता है।

विरोध करने वालों का तर्क है कि वर्तमान में दादा गुरु का भव्य स्वर्ण मंदिर मौजूद है, जहां नियमित पूजा-अर्चना होती है। ऐसे में खुले मैदान में विशाल प्रतिमा स्थापित होने पर उसकी साफ-सफाई, रखरखाव तथा प्राकृतिक प्रभावों से संरक्षण की चुनौतियां सामने आएंगी, जिससे धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

जाजम बोली को लेकर भी सवाल

जाजम बोली को लेकर भी समाज में चर्चाएं चल रही हैं। बताया जा रहा है कि इसकी एक ईंट का मूल्य एक आनी अर्थात लगभग 3,600 रुपये निर्धारित किया गया है। ऐसे में बड़ी बोलियों में लाखों रुपये तक की राशि लग सकती है।

कुछ लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि लगाने वालों के वित्तीय स्रोतों को लेकर भी भविष्य में विभिन्न प्रकार के प्रश्न उठ सकते हैं।

ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मोहनखेड़ा जैसे प्रतिष्ठित जैन तीर्थ में लगातार सामने आ रहे विवादों ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। समाज के अनेक लोग दबी जुबान में इसके लिए प्रबंधन को जिम्मेदार बता रहे हैं।

कुल मिलाकर संतों और प्रबंधन के बीच विवाद, कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा, ओल्ड एज होम परियोजना को लेकर मतभेद तथा स्टैच्यू ऑफ जैन यूनिटी को लेकर समाज में बढ़ती असहमति ने इस बार मोहनखेड़ा जैन तीर्थ को विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है। अब समाज की निगाहें ट्रस्ट, प्रशासन और वरिष्ठ संतों पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान किस प्रकार निकालते हैं।

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