भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के गठन के बाद प्रदेश में आयोग की गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की सक्रियता के चलते आयोग जनसमस्याओं के प्रति गंभीर और संवेदनशील नजर आ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आयोग ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
इंदौर में गहराया जल संकट, टैंकरों के भरोसे प्यासा शहर
इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शहर के लगभग 60 से 70 प्रतिशत रहवासी क्षेत्र पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति बाधित होने से लोगों को पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
नगर निगम द्वारा टैंकरों के माध्यम से जल वितरण की व्यवस्था की गई है, लेकिन यह व्यवस्था सीमित क्षेत्रों तक ही प्रभावी दिखाई दे रही है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में नागरिकों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
इसी मामले में मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए नगर निगम आयुक्त, इंदौर से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। उल्लेखनीय है कि इंदौर में जल संकट और टैंकर निर्भरता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
शर्मनाक पुलिस कारनामा : पांच घंटे पहले मृत छात्रा को बनाया फरियादी
ग्वालियर जिले के पड़ाव थाना क्षेत्र में पुलिस की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विगत माह एक पीएचडी छात्रा के साथ एक युवक द्वारा दुष्कर्म किया गया था। छात्रा ने दुष्कर्म की एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस कार्यालय से लेकर पड़ाव थाने तक लगातार चक्कर लगाए, लेकिन पुलिस ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।
न्याय नहीं मिलने और लगातार उपेक्षा से परेशान होकर छात्रा ने आत्महत्या कर ली। हैरानी की बात यह रही कि छात्रा की मौत के करीब पांच घंटे बाद पुलिस ने उसे ही थाने में फरियादी दर्शाते हुए सूचना प्राप्त होना बताया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है और पुलिस अधीक्षक, ग्वालियर से जांच कर दो सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग सम्मेलन में मध्य प्रदेश आयोग की सहभागिता
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा 18 मई 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल में विशेष प्रतिवेदकों और विशेष पर्यवेक्षकों के साथ एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।
सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने की। इस दौरान मानव अधिकार उल्लंघन से जुड़े प्रकरणों की कार्यप्रणाली पर चर्चा हुई तथा विभिन्न राज्य आयोगों के अनुभवों का आदान-प्रदान किया गया।
आयोग की सक्रियता से पीड़ितों को मिली दो करोड़ से अधिक सहायता
मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग की सक्रिय पहल, निरीक्षण और जिला स्तर पर आयोजित जनसुनवाई के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आयोग द्वारा बड़ी संख्या में लंबित मामलों का निराकरण कर नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है।
विशेष रूप से आयोग अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह द्वारा लिए गए संज्ञान और कार्रवाई के परिणामस्वरूप पीड़ितों को 2 करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई है। आयोग की यह पहल मानव अधिकार संरक्षण और पीड़ित सहायता की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
