खेलो इंडिया : खेल प्रतिभाओं को उड़ान देने के लिए 36,441 करोड़ का ऐतिहासिक निवेश

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भारत में खेल प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही। कमी रही तो उन्हें सही समय पर सही मंच, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराने की। गांव की पगडंडियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल मैदानों तक पहुंचने वाले खिलाड़ियों की राह अब पहले की तुलना में आसान बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

केंद्र सरकार ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता सहित कुल 36,441 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। केंद्र सरकार के अनुसार, यह स्वतंत्रता के बाद भारतीय खेलों में सबसे बड़े निवेशों में से एक है और पिछली खेलो इंडिया योजना के मुकाबले लगभग आठ गुना अधिक है।

खेल बजट में बड़ा उछाल

इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले खेलो इंडिया कार्यक्रम के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान था। 2024-25 में यह राशि 800 करोड़ रुपये थी। यानी सरकार ने खेलों को केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता का माध्यम न मानकर युवाओं के विकास, रोजगार और राष्ट्रीय गौरव के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखना शुरू किया है।

दस गुना अधिक खिलाड़ियों तक पहुंचेगी मदद

नई योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ पहले की तुलना में करीब दस गुना अधिक खिलाड़ियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का जोर केवल पहले से स्थापित खिलाड़ियों पर नहीं, बल्कि ऐसे बच्चों और युवाओं को खोजने पर है, जिनमें खेल प्रतिभा तो है, लेकिन आर्थिक संसाधनों या सुविधाओं के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पाते।

इसके लिए जिला स्तर तक प्रतिभा पहचान की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। स्कूलों, स्थानीय खेल मैदानों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा खोज अभियान चलाकर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण की अगली सीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा। इससे छोटे शहरों और गांवों के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा।

प्रशिक्षण से पोषण तक मिलेगा सहयोग

खेलो इंडिया का लाभ केवल प्रतियोगिता में भाग लेने तक सीमित नहीं रहेगा। चयनित खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, कोचिंग, खेल सुविधाएं, डाइट और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की खेल योजनाओं का उद्देश्य खिलाड़ी के पूरे करियर को समर्थन देना है प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्च स्तरीय प्रदर्शन तक।

खिलाड़ियों के लिए आधुनिक खेल विज्ञान भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। फिटनेस, पोषण, चोट से बचाव, रिकवरी और प्रदर्शन के वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इससे भारतीय खिलाड़ी केवल मेहनत के भरोसे नहीं, बल्कि आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर सकेंगे।

गांव और छोटे शहरों को मिलेगा बड़ा फायदा

भारत में अनेक प्रतिभाएं ऐसे परिवारों से आती हैं, जहां महंगे खेल उपकरण, निजी कोच या बड़े शहरों की खेल अकादमियों का खर्च उठाना संभव नहीं होता। नई खेलो इंडिया व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी आर्थिक बाधाओं को कम करना है। जिला स्तर पर खेल सुविधाओं को विकसित करने से खिलाड़ियों को शुरुआती प्रशिक्षण के लिए महानगरों की ओर जाने की मजबूरी कम होगी। सरकार ने खेल बुनियादी ढांचे को तीन स्तरों पर मजबूत करने और स्कूलों में प्रतिभा खोज पर विशेष जोर देने की बात कही है। मध्य प्रदेश में भी खेलो इंडिया के 52 केंद्र संचालित हैं और भोपाल को हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

केवल खिलाड़ी नहीं, पूरा खेल तंत्र होगा मजबूत

नई योजना का एक बड़ा बदलाव यह है कि इसका लक्ष्य केवल खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि पूरे खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। बेहतर कोच तैयार करना, खेल विज्ञान और तकनीक को बढ़ावा देना, प्रतियोगिताओं की संख्या बढ़ाना और खिलाड़ियों को अधिक प्रतिस्पर्धी अनुभव देना भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। केंद्र सरकार ने 2026-27 के बजट में खेलो इंडिया मिशन शुरू करने की घोषणा भी की थी। खेल मंत्रालय के लिए 4,479.88 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया, जो मंत्रालय के लिए अब तक का सबसे अधिक बजटीय प्रावधान बताया गया है।

खिलाड़ियों के लिए इसका क्या अर्थ है?

किसी खिलाड़ी के लिए इस योजना का वास्तविक महत्व तब समझ आता है, जब वह बिना पर्याप्त संसाधनों के मैदान में उतरता है। यदि उसे उसके जिले में ही प्रशिक्षित कोच, बेहतर मैदान, खेल उपकरण, पोषण, प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर और आगे बढ़ने का मार्ग मिल जाए, तो उसकी प्रतिभा के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। नई व्यवस्था में प्रतिभा खोज से लेकर प्रशिक्षण और प्रतियोगिता तक एक निरंतर प्रणाली विकसित करने का प्रयास है। इसका फायदा विशेष रूप से ग्रामीण, आदिवासी, आर्थिक रूप से कमजोर और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को मिल सकता है।

खेल बनेगा करियर का मजबूत विकल्प

भारत में लंबे समय तक माता-पिता खेल को करियर के बजाय पढ़ाई के बाद की गतिविधि मानते रहे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों की लगातार सफलता ने इस सोच को बदला है। नई खेलो इंडिया योजना इसी बदलाव को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि प्रतिभा की पहचान समय पर हो, खिलाड़ी को वर्षों तक वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिले और प्रतियोगिताओं का पर्याप्त अनुभव मिले, तो ओलंपिक, एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भारत की पदक संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

युवा शक्ति में निवेश है 36,441 करोड़ रुपये

36,441 करोड़ रुपये का यह निवेश केवल खेल मैदानों पर खर्च होने वाली राशि नहीं है, बल्कि भारत की युवा शक्ति में किया गया निवेश है। असली सफलता तब होगी, जब इस धन का लाभ कागजों से निकलकर गांव के उस बच्चे तक पहुंचे, जिसके पास प्रतिभा तो है, लेकिन अवसर नहीं। यदि खेलो इंडिया उस बच्चे को पहचानकर प्रशिक्षण, पोषण, संसाधन और मंच उपलब्ध करा देता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के खेल मैदानों से ऐसे अनेक चैंपियन निकल सकते हैं, जो दुनिया के सामने तिरंगा ऊंचा करें।

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