मध्य प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग की नई पहलें, कुपोषण से निपटने पर जोर

nirmala bhuriya

झाबुआ। मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया से पत्रकार दिलीप सिंह ने विभाग के कामकाज, कुपोषण नियंत्रण, आंगनवाड़ी व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और आगामी योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में मंत्री ने विभाग की उपलब्धियों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाने और जनभागीदारी बढ़ाने की योजनाओं की जानकारी दी।

मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया की प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए विभाग ने मैदानी स्तर तक अपनी पहुंच मजबूत की है। लंबे समय से प्रशिक्षण से वंचित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है। उनके अनुसार 12,607 मिनी आंगनवाड़ियों को मुख्य आंगनवाड़ियों में परिवर्तित किया गया है, जिससे कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों तक विभागीय सेवाओं की पहुंच बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि पिछले करीब सवा दो वर्षों में विभागीय MIS के माध्यम से मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। रियल टाइम सिस्टम के जरिए पर्यवेक्षक, CDPO और DPO के क्षेत्रीय दौरों की निगरानी की जा रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की उपस्थिति के लिए फेस रिकॉग्निशन सिस्टम लागू किया गया है। मंत्री के मुताबिक इससे पोषण आहार वितरण और हितग्राहियों की निगरानी को भी बेहतर बनाने में मदद मिली है।

ऑनलाइन नियुक्तियों से पारदर्शिता पर जोर

मंत्री ने कहा की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ऑनलाइन नियुक्ति की प्रक्रिया अपनाई गई है। दो चरणों में 22 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां प्रक्रिया में हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के माध्यम से 19 हजार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां की गईं, जबकि 419 से अधिक महिला सुपरवाइजरों की नियुक्तियां हो चुकी हैं। आगे 400 से अधिक महिला सुपरवाइजरों की नियुक्ति की जाएगी।

झाबुआ के मोटियाई नवाचार पर भी चर्चा

झाबुआ में कुपोषण दूर करने के लिए किए गए ‘मोटियाई’ नवाचार को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि यह उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण और भावनात्मक अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय की स्वैच्छिक महिला कार्यकर्ताओं ने बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के लिए बिना किसी पारिश्रमिक की मांग के काम किया।

मंत्री के अनुसार किसी स्थानीय मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू करने से पहले उसका व्यवस्थित अध्ययन, संसाधनों की उपलब्धता, कार्यबल का प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक तेल से बच्चों की मालिश जैसे प्रयासों से पोषण स्तर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है और अन्य जिलों में भी अलग-अलग स्थानीय नवाचार किए जा रहे हैं।

कुपोषण के आंकड़ों को लेकर मंत्री का दावा

कुपोषण के स्तर को लेकर मंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में पिछले दो दशकों में कुपोषण बढ़ने के बजाय लगातार कम हुआ है। उन्होंने NFHS-3 (2005-06) और NFHS-5 (2019-21) के आंकड़ों की तुलना का हवाला देते हुए कहा कि कम वजन की श्रेणी में 45 प्रतिशत सुधार, दुबलेपन की श्रेणी में 46 प्रतिशत सुधार और ठिगनेपन की श्रेणी में 29 प्रतिशत सुधार हुआ है। मंत्री ने इसे प्रदेश में कुपोषण कम करने की दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम बताया।

प्रदेश में ICDS के तहत आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पूरक पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं दी जाती है।

सक्षम आंगनवाड़ी में स्मार्ट सुविधाएं

मंत्री ने बताया कि प्रदेश की 24,662 आंगनवाड़ियों को ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें बच्चों के लिए स्मार्ट LED टीवी के माध्यम से डिजिटल शिक्षा, वाटर प्यूरीफायर, नए खिलौने, फर्नीचर और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

उन्होंने बताया कि 38,901 आंगनवाड़ी भवनों के विद्युतीकरण के लिए 80.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। लक्ष्य 2030 तक प्रदेश के हर आंगनवाड़ी केंद्र को बिजली से जोड़ना है।

इसके साथ ही बच्चों के लिए APAAR ID, माताओं और बच्चों के डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के लिए ABHA ID और लाभार्थी सत्यापन के लिए आधार फेस मैचिंग जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं पर भी जोर दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिकाएं विकसित कर स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली सब्जियों और फलों को बच्चों के पोषण में शामिल करने की योजना भी बताई गई।

महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर और योजनाओं का विस्तार

महिला सुरक्षा और सहायता के क्षेत्र में मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों तथा बड़ी आबादी वाले जिलों में एक से अधिक वन स्टॉप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर महिलाओं को चिकित्सा, कानूनी सहायता, परामर्श और सुरक्षा सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।

उन्होंने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए इसे विभाग की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। वहीं मुख्यमंत्री लाड़ली लक्ष्मी योजना के जरिए बालिकाओं के पोषण, शिक्षा और भविष्य निर्माण को समर्थन देने की बात कही। मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार लाड़ली लक्ष्मी योजना का उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य को मजबूत करना है।

आंगन मिलन से बढ़ेगी जनभागीदारी

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित किए जा रहे ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रमों को लेकर मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को केवल पोषण वितरण केंद्र न रखकर समुदाय और जनभागीदारी के केंद्र के रूप में विकसित करना है।

कार्यक्रम के तहत ग्रामीण महिलाओं, माताओं और धात्री माताओं को आंगनवाड़ी केंद्रों पर बुलाकर स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए माताओं के साथ संवाद स्थापित करने और स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सम्मान

मंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रमों के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जा रहा है।

इसके अलावा उनके कार्यस्थल के माहौल को बेहतर बनाने, पोषण ट्रैकर जैसे डिजिटल उपकरणों के संचालन में मार्गदर्शन देने और उनके सुझावों को विभागीय कार्यप्रणाली में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है।

कुल मिलाकर महिला एवं बाल विकास विभाग की रणनीति में कुपोषण नियंत्रण के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण, डिजिटल मॉनिटरिंग, महिला सशक्तिकरण, कर्मचारियों की नियुक्ति और समुदाय की भागीदारी को प्रमुखता दी जा रही है।

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