इस वर्ष 24 अप्रैल 2026 शुक्रवार को मां बगलामुखी जयंती है। दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी विद्या का 8वां स्थान है। शत्रुओं पर विजय की कामना के लिये मां बगलामुखी की साधना विशेष तौर पर की जाती है। मां बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिए माता की आराधना के कई तरिके तंत्र शास्त्र और देवी महापुराण और दस महाविद्याओं के अंतर्गत बताये गये है। लेकिन मां बगलामुखी की आराधना किसी अच्छे, जानकार गुरू की निश्रा में करना चाहिये।
मां बगलामुखी के इस बीज मंत्र का करें जप
आम साधक को मां बगलामुखी की साधना करने के लिये 24 अप्रैल 2026 बगुलामुखी जंयती के अवसर पर सूर्योदय से पहले उठकर दिन चर्या की क्रियाओं से निवृत होकर स्नान, ध्यान करके फिर मां की आराधना प्रारंभ करना चाहिये। मां बगुलामुखी के चित्र अथवा बगलामुखी यंत्र समुख रखे और पंच्चोपचार पूजन विधि से पूजा करें और मां का बीज मंत्र ह्लीं या फिर ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः का जाप हल्दी की माला से करें।
मां बगलामुखी की उत्पत्ति भगवान विष्णु से हुई थी और उन्होनें मदन नामक राक्षस की जिव्हा काटकर उसका वध किया था। तब माता ने राक्षस की प्रार्थना पर उसे वरदान दिया था की मां की पूजा के समय उसकी भी पूजा की जाएगी।
मां के पति के रूप में पूजे जाते है एकावक्त्र भैरव
मां बगलामुखी के साथ छटवें भैरव के रूप में एकावक्त्र भैरव जो कि एक मुख वाले है उनका भी पूजन किया जाता है, ऐसी मान्यता है कि ये मां के पति के रूप में पूजे जाते है।
मां बगलामुखी को प्रसन्न करने के लिये उनकी साधना के विधान के साथ ही यज्ञ भी किये जाते है। त्रिकोण हवन कुंड बनाकर फिर उसमें मां बगलामुखी के नाम की आहूतियां दी जाती है। शत्रुओं के विनाश के लिये मां के नाम से मिर्ची यज्ञ भी किया जाता है। वहीं शत्रुओं पर विजय की कामना के लिये भी मां बगलामुखी के हवन किये जाते है। उज्जैन के पास आगर मालवा से आगे मां बगलामुखी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। जहां पर साल भर माता के दर्शनों के लिये भक्तों का मेला लगा रहता है। कहा जाता है इस मंदिर में मां की स्थापना पांण्डवों के द्वारा की गई थी, भक्त माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से यहां आते है। यहां प्रतिदिन सैकडों लोग प्रतिदिन हवन कराते है।
मान्यता है की माता प्रसन्न होने पर अपने भक्तों की रक्षा करती है और सर्वत्र उनकी विजय होती है, शत्रु उनके पास तक नहीं भटकते है। दस महाविद्याओं में से 8वीं विद्या के रूप में मां की आराधना का विधान है। इस वर्ष 24 अप्रैल को मां की जंयती है। इस दिन बड़ी संख्या में माता के भक्त उनकी पूजा आराधना कर मां से अपनी और परिवार की सुख शांति की कामना करते है।
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