पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के अंतिम चरण का मतदान 29 अप्रैल को समाप्त हो गया। इसके साथ ही विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल सामने आए है। इस बार सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल को लेकर है, जहां ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस लगातार तीन बार सत्ता में रही है। अब सवाल यह है की क्या वे चौथी बार भी सत्ता में वापसी कर पाएंगी या भारतीय जनता पार्टी पहली बार राज्य में सरकार बनाएगी।
मतदाता आंकड़े और विवाद
पश्चिम बंगाल में कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ थी। हालांकि, विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे कुल संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई। इस प्रक्रिया के कारण लगभग 11.8% मतदाता कम हो गए। आरोप लगाए जा रहे है की हटाए गए नामों में बड़ी संख्या तृणमूल समर्थकों की हो सकती है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते है।
SIR बना चुनावी मुद्दे
इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने SIR को प्रमुख मुद्दा बनाया और भाजपा पर कई आरोप लगाए। पार्टी ने यह भी कहा की भाजपा के सत्ता में आने पर राज्य में मांस-मछली खाने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसके जवाब में भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सार्वजनिक रूप से मांसाहार करके अपनी बात रखी।
नरेंद्र मोदी ने कई रैलियों को संबोधित किया, जबकि अमित शाह ने चुनावी रणनीति को मजबूती दी। वहीं योगी आदित्यनाथ ने हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर प्रचार किया। भाजपा ने महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और कथित घुसपैठ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
कानून-व्यवस्था और चुनावी माहौल
इस बार चुनाव आयोग के सख्त रवैये के चलते केंद्रीय बलों की बड़ी तैनाती की गई, जिससे राजनीतिक हिंसा पर काफी हद तक नियंत्रण रहा। पिछली बार की तुलना में इस बार चुनाव अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहे।
पिछला चुनाव परिणाम
पिछले विधानसभा चुनाव में 294 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस को 215 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा को 77 सीटें प्राप्त हुई थी। GJM(T) और ISF को 1-1 सीटें मिली थी।
एग्जिट पोल के अनुमान
विभिन्न एग्जिट पोल के अनुसार इस बार भाजपा को लगभग 42.5% वोट शेयर मिल सकता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को करीब 40% वोट मिलने का अनुमान है। इन आंकड़ों के आधार पर कई एजेंसियां यह संकेत दे रही है की राज्य में सत्ता परिवर्तन संभव है।
विभिन्न एजेंसियों और जनमत सर्वेक्षणों के आधार पर पोल ऑफ पोल्स में भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि, वास्तविक तस्वीर 4 मई 2026 को सामने आएगी, जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे। तब ही यह स्पष्ट हो पाएगा की पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाती है।

